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अगर तेज़ आँधी, तूफ़ान या चक्रवात में सोलर पैनल या उसका स्ट्रक्चर उड़ जाता है, तो कई स्थितियाँ हो सकती हैं:
1. वारंटी (Warranty) का क्या होगा?
अधिकांश सोलर पैनल की प्रोडक्ट वारंटी निर्माण दोष (manufacturing defect) पर लागू होती है।
प्राकृतिक आपदा (Act of God) जैसे तूफ़ान, चक्रवात, ओलावृष्टि, बिजली गिरना आदि आमतौर पर वारंटी में कवर नहीं होते।
इसलिए पैनल उड़ने या टूटने पर कंपनी मुफ्त में नया पैनल देने के लिए बाध्य नहीं होती।
2. बीमा (Insurance) होने पर
यदि आपके सोलर सिस्टम का बीमा कराया गया है, तो बीमा कंपनी नुकसान का आकलन करके क्लेम दे सकती है।
बड़े PM-KUSUM और MW प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर बीमा कराया जाता है।
3. इंस्टॉलेशन में गलती होने पर
यदि स्ट्रक्चर IS मानकों के अनुसार नहीं लगाया गया था, पर्याप्त फाउंडेशन नहीं था, या बोल्ट/क्लैम्प कमजोर थे, तो EPC/इंस्टॉलर की जिम्मेदारी बन सकती है।
ऐसे मामलों में इंस्टॉलेशन कंपनी से दावा किया जा सकता है।
4. नुकसान से बचने के उपाय
Wind Load Design के अनुसार स्ट्रक्चर लगवाएं।
उच्च गुणवत्ता वाले SS Fasteners और Mid/End Clamps का उपयोग करें।
नियमित रूप से बोल्ट और नट की जांच करें।
राजस्थान जैसे क्षेत्रों में कम से कम 150–180 km/h डिज़ाइन विंड स्पीड के अनुसार स्ट्रक्चर चुनना बेहतर होता है (प्रोजेक्ट की लोकेशन के अनुसार इंजीनियरिंग डिज़ाइन अलग हो सकती है)।
PM Surya Ghar / Rooftop सिस्टम में
यदि 3 kW, 5 kW या 10 kW का रूफटॉप सिस्टम आँधी में उड़ जाता है:
DISCOM को सूचना दें।
सिस्टम को सुरक्षित रूप से डिस्कनेक्ट करवाएं।
इंस्टॉलेशन कंपनी से साइट निरीक्षण करवाएं।
यदि बीमा है तो तुरंत क्लेम दर्ज करें।
कई मामलों में पैनल नहीं बल्कि कमज़ोर स्ट्रक्चर, ढीले क्लैम्प या खराब एंकरिंग उड़ने का मुख्य कारण होते हैं। इसलिए इंस्टॉलेशन की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है।
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